बीते दिनों एक के बाद एक कई ऐसी खबरें आयीं जिससे सबको यह महसूस होने लगा कि भारत के 56 इंची सीना वाले नेता की रीढ़ की हड्डी गायब हो गयी है। ईरान पर अमेरिकी-इजरायल हमले से पहले हमारा यह नेता इजरायल की यात्रा पर था। शायद इजरायल में यह अपनी रीढ़ की हड्डी नेतन्याहू को भेंट करके आ गया।
पहले 28 फरवरी को जब अमेरिकी-इजरायली हत्यारों ने ईरान पर हमला बोला तो इस हमले के अन्यायपूर्ण होने को सारी दुनिया ने महसूस किया। पर हत्यारों को अपनी रीढ़ की हड्डी भेंट चढ़ा आये हमारे नेता को इसमें कुछ भी अन्याय नजर नहीं आया। उसने मौन साधे रखा। बाद में जब ईरान ने आत्मरक्षा में खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डों पर हमला बोला तो इस नेता को खाड़ी मुल्कों की चिंता हुई और उसने ईरानी हमले पर चिंता व्यक्त कर डाली।
युद्ध शुरू होने के कुछ वक्त बाद अमेरिकी सरगना ट्रम्प ने जब भारत को एक माह तक रूस से तेल खरीदने की अनुमति दी तो एक बार फिर विपक्षियों ने हल्ला काटा कि भारत एक संप्रभु देश है तो भला ट्रम्प की अनुमति का क्या मतलब है। क्या अब भारत ट्रम्प के आदेश पर चलेगा। पर रीढ़विहीन हो चुके हमारे नेता ने मौन साधे रखा। उन्होंने इतनी भी हिम्मत नहीं दिखाई कि उठकर जवाब देते कि भारत संप्रभु देश है और उसे ट्रम्प की अनुमति की कोई जरूरत नहीं है।
तीसरी घटना 4 मार्च 2026 को हुई जब अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने भारतीय समुद्री सीमा के निकट हिंद महासागर में ईरानी जहाज को टारपीडो मार कर डुबो दिया। यह जहाज भारत से नौसेना अभ्यास के बाद ईरान लौट रहा था। जहाज में सवार 180 सदस्यों में 80 के मारे जाने की खबर है। 32 लोग श्रीलंका के द्वारा बचा लिये गये व शेष गायब हैं। ऐसे में भारत से जा रहे जहाज पर अमेरिकी हमला एक तरह से भारत पर हमले सरीखा था। ऐसे में लोगों को उम्मीद जगी कि अब तो भारत का नेता नींद से जागेगा व अमेरिका का विरोध करेगा। पर अफसोस रीढ़विहीन नेता फिर मौन साधे रहा।
अपने नेता की इस स्थिति से देशवासी हैरान- परेशान हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि जो नेता सीना तान नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक कांग्रेस की करतूतें उजागर करता था, जो पाकिस्तान को घर में घुस कर मारने की धमकी देता था आखिर अमेरिका के आगे वह भीगी बिल्ली क्यों बन जाता है। इससे पहले भी ट्रम्प भारत-पाक युद्ध रुकवाने का पचासों बार श्रेय ले चुका है पर इस नेता की एक बार भी हिम्मत नहीं पड़़ी कि वो बोल सके कि ट्रम्प झूठ बोल रहा है।
अब देश की जनता अपने नेता की रीढ़़ की हड्डी को लेकर असमंजस में है। उसे शक होता जा रहा है कि नेता के पास रीढ़ की हड्डी बची भी है या नहीं। कुछ लोग नेता के इलाज की बात कर रहे हैं।
उधर नागपुर के संघ मुख्यालय में बैठे मोहन भागवत नेता के इस प्रदर्शन से खुश हैं। उन्हें नेता की सेहत में कोई दिक्कत नजर नहीं आ रही। वे जानते हैं कि उनकी नागपुर फैक्टरी में बनने वाली रीढ़ की हड्डियां अमेरिकी तकनीक से बनती हैं। इन रीढ़ की हड्डियों की खासियत यह है कि वो हर छोटे-मोटे पड़ोसियों के सामने तो पूरी अकड़ से खड़ी रहती हैं। पर अमेरिका के सामने आते ही इसकी समस्त अकड़ गायब हो जाती है। वह भीगी बिल्ली की तरह झुक जाती हैं। यही हड्डी 56 इंची नेता और संघ प्रमुख के साथ सारे संघी कारकूनों की देह में पायी जाती है।
देर-सबेर जनता भी यह जान जायेगी कि डिफेक्ट हमारे 56 इंची नेता में नहीं, उसे रीढ़ की हड्डी देने वाली नागपुर की फैक्टरी में है। तब वह इस नेता के साथ समूची फैक्टरी को ही उखाड़ फेंकेगी। इसके साथ ही नागपुर फैक्टरी को पाल पोस रहे पूंजीपतियों का भी हिसाब जनता करने को बढ़ चलेगी।