विविध

काकरोच सरदार और समाजवादी जनतांत्रिक मोर्चा

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

चले थे दुबे बनने बन गये छब्बे

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भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अनर्गल डींगे हांकने वाली संघी मशीनरी इतने खुशनुमा दावे करती रहती है कि जनता तो क्या पूंजीपति वर्ग भी उन पर भरोसा करने से इंकार करता रहा है

सामंती सद्गुण और पूंजीवादी बराबरी

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थ्योरेस्टीन वेब्लेन एक अमरीकी समाजशास्त्री थे। 1899 में उन्होंने अमेरिकी समाज के ऊपर एक किताब प्रकाशित की: द थ्योरी आव लीशर क्लास (फुरसती वर्ग के बारे में सिद्धान्त)। इस

आई टी सी ने किया सेंचुरी मिल का अधिग्रहण

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सेन्चुरी मिल जो पिछले 42 वर्ष या चार दशक से कागज उद्योग में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखे हुए थी उसका नाम ‘‘सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल’’ से अब आई टी सी लिमिटेड हो चुका है जि

मकरूह

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‘‘गत्ते बिछा लो खाना खा लेते हैं।’’ राम मोहन ने साथ में काम कर रहे लड़कों को संबोधित करते हुए कहा। रात के नौ बज चुके हैं। सभी लड़के लेथ मशीन में अपने-अपने काम पर लगे हुए है

एथेनाल ब्लेंड पेट्रोल: दावे और हकीकत

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आजकल ई-20 पेट्रोल का मामला काफी चर्चा में है। मोदी सरकार ने ई-20 एथेनाल मिश्रित पेट्रोल को ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘किसान कल्याण’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ जैसे दावों के साथ बिना बहस

अखिल भारतीय विरोध कार्यक्रम के तहत विरोध प्रदर्शन

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रुद्रपुर/ 10 अगस्त को अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन की 83वीं बरसी पर मोदी सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों एवं यूनियनों ने श्रमिक संयुक्त

नई राह दिखलाते बच्चे

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अंधेरे के घटाटोप में 
प्रचार तंत्र की लहालोट में 
लोकतंत्र पर पड़ी चोट में  
दीपक एक जलाते बच्चे 
जग का तिमिर मिटाते बच्चे
नई राह दिखलाते बच्चे 

उधमसिंह के शहादत दिवस एवं मुंशी प्रेमचंद के जन्मदिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

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प्रतिवर्ष 31 जुलाई को हमारे देश के प्रगतिशील-क्रांतिकारी संगठन महान क्रांतिकारी उधमसिंह का शहादत दिवस और महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिवस मनाते हैं। उधमसिंह, जि

परेशान हाल अंधभक्त और उनके आका

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अंधभक्त को न तो तर्क से, न विज्ञान से, न भारत की महान ऐतिहासिक दार्शनिक व ज्ञान परम्परा से और न ही भारत के वर्तमान या भविष्य से कोई लेना-देना है। और यह भी सच है कि अंधभक्त जिनका अनुयायी है उनका भी इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे पौराणिक कथाओं को इतिहास का दर्जा देना चाहते हैं और अपने कुटिल हितों को आस्था का आवरण पहनाकर परम सत्य का दर्जा दिलाना चाहते हैं।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।