आटो-रिक्शा टैम्पो चालक वेलफेयर एसोशिएसन का सम्मेलन सम्पन्न

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बरेली/ आटो-रिक्शा टैम्पो चालक वेलफेयर एसोशिएसन का 11 वां सम्मेलन बरेली जं. स्थित मनोरंजन सदन में दिनांक 14 दिसम्बर को सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में राजनैतिक रिपोर्ट एवं सांगठनिक रिपोर्ट पेश की गयी जिसे सम्मेलन ने चर्चा करके पारित किया। सम्मेलन ने दो राजनैतिक प्रस्ताव भी पारित किये। शहीदों को श्रद्धांजलि एवं गाजा में जारी नरसंहार के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये गये। सम्मेलन ने कई कार्यकारिणी का चुनाव किया जिसमें कृष्णपाल को पुनः अध्यक्ष चुना गया और सत्येन्द्र पाल को महामंत्री चुना गया। 
    
राजनैतिक रिपोर्ट पर बात रखते हुए कृष्णपाल ने बताया कि आज पूरी दुनिया में पूंजीवादी संकट बढ़ता जा रहा है जिसका सारा बोझ मेहनतकश वर्ग पर डाला जा रहा है। जिसके कारण असंतोष बढ़ता जा रहा है। परिणामस्वरूप श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मेडागास्कर जैसे विद्रोह हो रहे हैं। शासक वर्ग इन संघर्षों एवं विद्रोह से निपटने के लिए कई सारे दमनकारी कानूनों का निर्माण कर रहा है और इससे भी आगे बढ़कर फासीवादी पार्टियों के हाथ में सत्ता सौंप रहा है। जिसका मुकाबला व्यापक एकता बनाकर ही दिया जा सकता है। 
    
सम्मेलन में रिपोर्ट पर चर्चा करते हुए सत्येन्द्र पाल ने कहा कि सरकार की नीतियों का प्रभाव आटो टैम्पो वालों पर भी पड़ रहा है। बेरोजगारी बढ़ रही है जिसके कारण लोग घर की जमा पूंजी लगाकर एवं बैंकों से कर्ज लेकर ऑटो-टैम्पो व ई-रिक्शा खरीद रहे हैं। जिस पर सरकार भारी मात्रा में बेरोजगारों से भी जीएसटी वसूल रही है। आटो टैम्पो व ई-रिक्शा की संख्या बढ़ने के कारण बारह-बारह घंटे धूप-बरसात व ठंड में काम करने के बाद भी परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। गाड़ी की किस्त भरें कि घर का खर्च चलायें या बच्चों की फीस भरें। और किसी बीमारी की हालत में तो ऑटो टैम्पो तक बेचने की नौबत आ जाती है। 
    
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए बीटीयूएफ के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि आज देश में लागू निजीकरण-उदारीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों का परिणाम भारी बेरोजगारी के रूप में दिख रहा है। सम्मानजनक रोजगार के अभाव में पढ़े-लिखे नौजवान ऑटो-टैम्पो ई-रिक्शा खरीदकर या किराये पर लेकर चलाते हैं जिसके कारण इनकी संख्या बहुत बढ़ गयी है। प्रतियोगिता बढ़ने के कारण उनकी आय पर भी बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है इन परिस्थितियों में इन पर सरकार ने एस्मा लगा दिया है। हम एस्मा लगाने का इस सम्मेलन के माध्यम से विरोध करते हैं। 
    
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए वीरेन्द्र मौर्य ने कहा कि पिछले अठारह साल से यूनियन चालकों के हितों के लिए काम कर रही है। प्रशासन द्वारा आटो चालकों का अवैध चालान काटने के खिलाफ व कई रूट को बंद करने के खिलाफ हमने मजबूती से संघर्ष चलाया है। हमें अपनी ताकत को और बढ़ाना होगा। इसके लिए अपने साथ चालकों को जोड़ना होगा, नयी कमेटियों का निर्माण करना होगा। तब जाकर हम अपनी मांगों को मनवाने में सफल होंगे। 
    
सम्मेलन को इंकलाबी मजदूर केन्द्र के ध्यानचन्द्र मौर्य, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद के हरिशंकर, कर्मचारी कल्याण सेवा समिति के जितेन्द्र मिश्रा, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के ललित, परिवर्तनकामी छात्र संगठन की निशा आदि ने संबोधित किया। 
    
अंत में एक जुलूस निकाला गया जो बरेली जंक्शन से कचहरी चौकी चौराहा गांधी उद्यान, शहामतगंज होते हुए पुनः बरेली जंक्शन पर आकर समाप्त हुआ।     -बरेली संवाददाता

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