दुनिया भर में हत्यारे इजरायल का बढ़ता विरोध

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इजरायली शासकों द्वारा फिलिस्तीन में किये जा रहे नरसंहार का विरोध दुनिया भर में बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सम्बोधन के वक्त हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने इकट्ठा होकर न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से कुछ दूर टाइम स्क्वायर पर रैली निकाली और फिर सभा के बाद रैली संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की ओर बढ़ी। प्रदर्शनकारी नेतन्याहू की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। यह दुनिया भर की जनता का इजरायली सत्ता के प्रति बढ़ता विरोध ही था जिसने 50 देशों के राजनयिकों को नेतन्याहू के सम्बोधन का बहिष्कार करने को मजबूर कर दिया। यह भारी जनदबाव ही है कि संयुक्त राष्ट्र के 157 देश फिलिस्तीन को मान्यता देने को मजबूर हुए हैं। हालांकि उनकी यह मान्यता दिखावटी ही अि धक है। 
    
इजरायल विरोध की इसी कड़ी में रोमानिया में इजरायली हथियार निर्माता कम्पनी एल्बिट को देश से बाहर निकालने का ‘‘एल्बिट आउट’’ अभियान शुरू किया जाना है। रोमानिया में एल्बिट सिस्टम की तीन कम्पनियां मौजूद हैं जहां हथियारों के पुर्जे बनाये जाते हैं। इन हथियारों का गाजा में कत्लेआम में इस्तेमाल होता रहा है। इस अभियान में रोमानिया व इजरायल के बीच सैन्य आयात-निर्यात रोकने की भी मांग की जायेगी। 
    
22 सितम्बर को इटली भर में लगभग दस लाख लोगों ने फिलिस्तीन व समुद्री राहत जहाज फ्लोटिला के समर्थन में आम हड़ताल की। इस दौरान मजदूरों-कर्मचारियों ने बंदरगाह, रेलवे स्टेशन बंद कर देश को ठप कर दिया। राजधानी रोम में 3 लाख प्रदर्शनकारियों ने अपने मार्च से पहले शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन को अपने कब्जे में ले लिया। इससे पूर्व गोदी मजदूरों ने फ्लोटिला पर इजरायली हमले की दशा में समस्त बंदरगाह ठप कर देने का एलान किया था जो उन्होंने पूरा किया। हालांकि इटली की सरकार अभी भी इजरायली सरकार से न केवल सम्बन्ध बनाये हुए है बल्कि उसे हथियारों की आपूर्ति कर रही है। ऐसे में मजदूरों के बढ़ते तेवरों व सरकार की हठधर्मिता से तनावपूर्ण परिस्थिति बन रही है। मजदूर सत्ता के केन्द्रों पर अभी प्रतीकात्मक कब्जे के जरिये विरोध दर्ज करा रहे हैं पर आने वाले वक्त में वे वास्तविक कब्जे की ओर भी बढ़ सकते हैं। 
    
कुल मिलाकर दुनिया के हर कोने में इजरायली-अमेरिकी शासकों के खिलाफ मेहनतकश जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जगह-जगह जनता अपने शासकों से इजरायल से नाता तोड़ने की मांग के साथ सड़कों पर उतर रही है। पर अभी ज्यादातर शासक इजरायल के रस्मी विरोध से आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं। आने वाले वक्त में जनदबाव शासकों को रस्मी विरोध से वास्तविक विरोध में खड़ा होने को मजबूर कर सकता है।  

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