दिल्ली/ दिल्ली विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, छम्च् 2020 और गिरते जनवादी माहौल के खिलाफ छात्र संगठनों ने आर्ट्स फैकल्टी पर प्रदर्शन किया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. योगेश सिंह जी ने अपनी आपातकाल शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए 2025-2026 सत्र के लिए छात्रों की फीस 20 प्रतिशत बढ़ा दी है। यूनिवर्सिटी डेवलेपमेंट फंड के तहत जहां बच्चे पिछले साल (2024-2025) में 1200 रु. देते थे उसको 2025-2026 सत्र के लिए 1500 रु. कर दिया गया है। ऐसे ही अलग-अलग चीजों में इन्होंने 20 प्रतिशत से ऊपर की वृद्धि की है। दिल्ली विश्वविद्यालय की खुद की पालिसी है कि वह 1 साल के दौरान 10 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि नहीं कर सकती। यह फीस वृद्धि यूनिवर्सिटी इसलिए कर रही है क्योंकि यूजीसी द्वारा आवंटित राशि कम दी जा रही है। उदाहरण के लिए सत्र 2024-25 में दिल्ली विश्वविद्यालय ने पुस्तकालय के रखरखाव के लिए 544 करोड़ खर्च किए और इसके लिए यूजीसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय को मात्र 313 करोड रुपए ही आवंटित किए।
यूजीसी यूनिवर्सिटी को मजबूर कर रही है कि वह अपने खर्चे चलाने के लिए HEFA (Higher Education Financing Agency) से लोन लें। HEFA भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा और केनरा बैंक की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी से बनाई गई फाइनेंसिंग एजेंसी है, जो विश्वविद्यालयों को लोन देगी। और यह लोन विश्वविद्यालय को खुद चुकाना होगा। शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी का यह कदम इन सरकारी विश्वविद्यालयो को निजीकरण की तरफ ले जाएगा। और गरीब मेहनतकश आबादी के छात्र जो इन विश्वविद्यालयो में जैसे-तैसे आ जाते थे अब उनका इन विश्वविद्यालयों में पढ़ना मुश्किल हो जाएगा।
ऐसे में HEFA लोन, फीस वृद्धि और कैंपस में घटते जनवादी माहौल का विरोध जरूरी बनता है।
-दिल्ली संवाददाता