हरियाणा में लव जिहाद के नाम पर मुस्लिम परिवार का घर जलाया गया

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 फैक्ट फाइिंडंग रिपोर्ट

हरियाणा के भिवानी जिले के ढ़ाणी माहू गांव में 6 जुलाई 2025 को हिन्दू संगठनों से जुड़े दंगाइयों ने एक बार फिर लव जिहाद का आरोप लगाकर एक मुस्लिम परिवार के अलग-अलग बने दो घरों में आग लगा दी तथा लाखों का सामान जलाकर खाक कर दिया। इस मामले को लेकर 4 अगस्त 2025 को दिल्ली से आठ सदस्यीय एक फैक्ट फाइंडिंग (तथ्यान्वेषी) टीम तथ्यों की जांच के लिए भिवानी गई हुई थी। 
    
हमारी टीम ने पुलिस अधीक्षक भिवानी, तोशाम तहसील के डीएसपी तथा संबंधित थाने के थानाध्यक्ष और ढ़ाणी माहू गांव के सरपंच तथा गांव वालों से मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है।
    
सामान्य रिपोर्टिंग यह है कि ढ़ाणी माहू गांव के आसिन पुत्र पाल खान उम्र लगभग 27 साल, नाम के एक मुस्लिम लड़के पर राजस्थान की एक हिंदू लड़की को भगाने का आरोप था। लड़की की गांव की चाची लगने वाली एक महिला का मायका ढ़ाणी माहू गांव में है। ढ़ाणी माहू गांव में बनी गौशाला को चलाने वाला सुशील वर्मा और प्रदीप जो बजरंग दल से जुड़े हुए हैं, को जब यह बात पता चली तो उन्होंने इस मामले को नफरती मिर्च-मसाला लगाकर भड़का दिया तथा लड़कों का ग्रुप बनाकर उन्हें उत्तेजित कर 6 जुलाई को दिन में ही आसिन का नहीं आसिन के छोटे भाई हुसैन जो अपने मम्मी-पापा के साथ अलग रहता है, के दो घरों में आग लगाकर लाखों का सामान जलाकर खाक कर दिया।
    
इस मामले में पुलिस द्वारा धारा 191(2), 190, 326 (जी) 333 बीएनएस के अंतर्गत 15 नामजद व्यक्तियों तथा 10 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कई दिनों बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
    
हमारी टीम सबसे पहले पीड़ित परिवार से मिली। पीड़ित हुसैन के अनुसार 2 जुलाई को गांव के प्रदीप उर्फ काला पुत्र श्री जयवीर ने हुसैन के पिता को फोन कर गंदी-गंदी गालियां दीं और कहा कि तुम्हारा लड़का एक हिंदू लड़की को भगा कर लाया है। अब तुम्हारा बहुत बुरा हाल होगा। 
    
हुसैन के अनुसार लड़की का नाम पूनम है, जिसकी उम्र लगभग 26 साल है। उसका गांव हरपालु, थाना-हमीरवास, जिला-चुरु राजस्थान में है। पूनम पिछले तीन साल से आसिन के संपर्क में थी। वह एक परिपक्व और वयस्क लड़की है जो अपनी इच्छा से उसके संपर्क में है। उसके साथ किसी तरह की धोखाधड़ी अथवा दबाव नहीं बनाया गया है। आसिन देशी दवा की गांव-गांव में सप्लाई करता है। इसी दौरान लड़की उसके संपर्क में आई थी। पूनम भली-भांति जानती है कि आसिन शादीशुदा है। वह आसिन की पत्नी और बच्चों से भी मिल चुकी है। हुसैन और उसके पिता को एक डेढ़ साल पहले ही यह बात पता चली थी। हुसैन अपने रिश्तेदार और पिता को लेकर पूनम के पिता और उसके घर वालों से दो बार मिलकर यह बात बता चुके हैं। हुसैन ने पूनम के घर वालों को साफ-साफ बताया था कि वे लोग पूनम को समझा-बुझाकर रोक लें। आसिन और पूनम के बीच संबंध उचित नहीं हैं, लेकिन पूनम के घर वाले अपनी लड़की को नहीं रोक सके। इस बात को लेकर आसिन अपने भाई हुसैन और पिता पाल खान से नाराज हो गया। फिर आसिन ने हुसैन व पिता पाल खान से खूब लड़ाई-झगड़ा कर लिया तथा गांव में ही दूसरी तरफ अपना अलग घर बनाकर अलग ही रहने लगा था। उसने अपने मां-बाप और भाई से संबंध तोड़ लिया था। आसिन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव में ही लम्बे समय से अलग ही रहता है। यह बात प्रदीप और सुशील वर्मा सहित सभी गांव वालों को अच्छी तरह पता है।
    
हुसैन के अनुसार 3 जुलाई को पुलिस के साथ पूनम के भाई उसके घर आए हुए थे। हुसैन और उसके पिता ने पूनम के भाई को बताया कि आसिन यहां नहीं रहता है। हमारे से उसका कोई रिश्ता नहीं है, फिर भी पुलिस तथा लड़की के भाई सबक सिखाने की धमकी देकर वहां से चले गए। पुलिस राजस्थान की थी या हरियाणा की यह बात स्पष्ट नहीं है क्योंकि आसिन के खिलाफ कोई लड़की भगाने का मुकदमा किसी थाने में दर्ज नहीं किया गया है। गांव का प्रदीप और गौशाला संचालक सुशील वर्मा इस मामले को भड़काने में लगे हुए थे। 4 जुलाई को गौशाला में हुसैन के खिलाफ मीटिंग कर योजना बनाई गई। 5 जुलाई को शाम को लगभग 3ः30 बजे 30-40 लड़कों का एक झुण्ड हुसैन के घर एकत्रित होकर गालियां दे देकर हल्ला-गुल्ला कर रहे थे।  हो-हल्ला से घबराकर डर के मारे हुसैन ने 112 पर फोन कर पुलिस की मदद मांगी थी। फोन करने के एक घंटा बाद पीसीआर के तीन पुलिस वाले घर पर आए थे। लेकिन पुलिस वाले भीड़ को खदेड़ने अथवा भगाने के बजाय, हुसैन को ही डराने वाली बात करने लगे। हुसैन के अनुसार पुलिस वालों ने उसे समझाया कि गांव वालों की भीड़ अधिक है, हम तीन पुलिसकर्मी तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाएंगे। तुम परिवार सहित अपना घर छोड़कर किसी और जगह चले जाओ। हुसैन अपने पूरे परिवार के साथ 5 जुलाई की शाम को ही डर कर अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर किसी रिश्तेदार के यहां चला गया।
    
गांव में प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 6 जुलाई को गौशाला संचालक व प्रदीप ने गौशाला में फिर मीटिंग की। मीटिंग में ढ़ाणी माहू के अलावा दूसरे गांव के लड़के भी शामिल हुए थे। उन्होंने योजना के अनुसार गांव में लगे सरकारी सीसीटीवी कैमरों और हुसैन के निजी कैमरे का बिजली कनेक्शन काटकर कैमरों को तोड़ दिया। फिर वे हुसैन के घर से 200 मीटर दूर बने खेल स्टेडियम में एकत्रित हुए। वहां पहुंचकर सब अपने चेहरों पर नकाब अथवा बड़े-बड़े मास्क लगाकर धार्मिक नारे लगाते हुए, जुलूस की शक्ल में हुसैन के घर पहुंचे। अब लड़कों को पूरी तरह हिंसक दंगाई बना दिया गया था। यानी वे पूरी तरह से कुछ भी करने को तैयार हो गए थे। सबसे पहले उन्होंने दोनों घरों को खंगाला, इस दौरान मिले जेवर और नगदी रुपये को अपने कब्जे में लिया। फिर दोनों घरों का पूरा सामान रोड पर निकाल कर पेट्रोल छिड़क कर रोड पर पड़े समान और दोनों घरों में आग लगा दी। गांव के किसी व्यक्ति के फोन करने पर पुलिस तथा अग्निशमन विभाग की गाड़ी आई थी, किंतु गाड़ी आने से पहले ही सब कुछ जलकर खाक हो चुका था। 
    
ढ़ाणी माहू के सरपंच रणवीर सिंह से हम लोग मिले उनके साथ सात-आठ ग्रामवासी भी बैठे हुए थे। सरपंच रणवीर सिंह ने हमें बताया कि हुसैन का भाई आसिन जो कि विवाहित है, ने एक हिंदू लड़की से रिश्ता बनाया हुआ था, लड़की गांव के एक परिवार की रिश्तेदारी में आती है। इसको लेकर हिंदू संगठन के लोग गुस्से में थे। सरपंच के साथ बैठे दूसरे लोगों ने हमसे सवाल किया कि आप ही लोग बताओ कि क्या एक शादीशुदा मुस्लिम लड़के का एक हिंदू लड़की से प्यार करना ठीक है? हमने भी उनसे पूछा कि लड़की के घर वालों ने तो आसिन के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया है, तो दूसरे लोग उनके मामले में क्यों दखल देना चाहते थे। इस पर वे लोग चुप्पी लगा गए। हमने पूछा कि हुसैन के घरों में आग लगाने वाले कौन लोग थे? इसके जवाब में सरपंच ने बताया कि वह आगजनी के समय मौके पर नहीं थे। लोगों ने बताया कि आग लगाने वाले सभी लोग मुंह ढंके हुए थे। इसलिए उन्हें किसी ने भी नहीं पहचाना। उन्होंने बताया कि मामला चार-पांच दिन से चल रहा था किंतु उन्हें पता नहीं चल पाया था। हुसैन के परिवार वालों ने भी ऐसी कोई बात सरपंच को नहीं बताई थी। फिर दंगाइयों को लेकर भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई। सरपंच के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद बजरंग दल और हिंदू महासभा के नेता उनके पास आकर हुसैन के परिवार के खिलाफ बयान देने को बोल रहे थे लेकिन सरपंच ने उन्हें साफ-साफ मना कर दिया था। एक वीडियो में हुसैन के भाई आसिन द्वारा दी गई धमकी के बाद सरपंच ने गांव वालों के साथ थाने जाकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। 
    
हमने गांव में हुसैन के घर के आस-पास के लोगों से भी बात की। हुसैन के घर के आस-पास मुस्लिम परिवार के अलावा दलित परिवार भी रहते हैं। उन्होंने बताया कि गांव में कभी हिंदू मुसलमान का विवाद नहीं हुआ है। यह पहला मामला है, जिसमें एक मुस्लिम परिवार के घर को पूरी तरह जला दिया गया। हुसैन का परिवार कोई असामाजिक काम नहीं करता है। यह लोग मेहनती हैं, इनके पूर्वज किसानों के पशुओं का खुर काटकर और बैठने वाला मुंढ़ा जैसे कुछ दस्तकारी के सामान बनाकर अपनी आजीविका जुटाते रहे हैं।
    
हम भिवानी एसपी कार्यालय गए लेकिन एसपी साहब कार्यालय में मौजूद नहीं थे। वहां मौजूद सदर डीएसपी से हम लोग मिले उन्होंने इस मामले में कोई जानकारी नहीं होने की बात बताई और तहसील तोशाम के डीएसपी तथा संबंधित थाना अध्यक्ष से मिलने को कहा। हम तहसील तोशाम गए किंतु वहां के डीएसपी महोदय भी आफिस में मौजूद नहीं थे। उनके पीए/सहायक ने कुछ बताने से मना कर दिया। फिर हम तोशाम थाना अध्यक्ष महावीर सिंह से मिलने गए। तोशाम थाना अध्यक्ष ने बताया कि 6 जुलाई 2025 को जब हुसैन के घर आग लगाई गई थी, वह मौके पर गए हुए थे। उस समय हुसैन के परिवार का कोई भी सदस्य घर पर नहीं था। संपर्क करने पर हुसैन ने बताया कि गांव में जान का खतरा है, इसलिए वह गांव छोड़कर एक रिश्तेदार के पास है। फिर हुसैन के रहने के ठिकाने पर दो पुलिसकर्मी गए थे। वहीं पर दिए गए उसके बयान के आधार पर 15 लोगों पर नामजद और 10 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। 4 अगस्त तक कुल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी, जो कि गांव के ही हैं। थानाध्यक्ष के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों ने अपना जुल्म कबूल कर लिया है। इस मामले में उच्च अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है जैसे ही किसी अन्य आरोपी के खिलाफ सबूत मिलेंगे हम उनकी गिरफ्तारी करेंगे। 
    
गांव में हमने देखा था कि हुसैन के घर पर लगा उसका निजी सीसीटीवी कैमरा तथा ग्राम पंचायत द्वारा लगाए गए सरकारी सीसीटीवी कैमरे सभी टूटे हुए थे। कैमरे क्यों टूटे हैं? इस सवाल पर थानाध्यक्ष ने बताया कि कुछ पता नहीं है। हमने पूछा कि कैमरों की डीवीआर जब्त की गई है क्या? उसका जवाब उन्होंने नहीं में दिया। आग बुझाने के बाद कोई कीमती या महत्वपूर्ण सामान अथवा उसका अंश/टुकड़ा की जब्ती की गई है क्या? इसका जवाब भी थानाध्यक्ष ने नहीं में दिया। थानाध्यक्ष महावीर सिंह ने ‘जांच डिस्क्लोज’ नहीं करने का हवाला देकर हम लोगों को आधी-अधूरी बात बताई अथवा वह मामले को छुपाने की कोशिश कर रहा था। 

निष्कर्षः हमने पाया कि हुसैन का भाई आसिन लम्बे समय से अपने पत्नी और बच्चों के साथ अलग रहता था। उसने अपना घर गांव में ही बनाया हुआ है, लेकिन हुसैन के घर से बहुत दूर है। इसके बावजूद दंगाइयों ने आसिन के घर को निशाना नहीं बनाया बल्कि हुसैन के घर और परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। हुसैन के पिता बुजुर्ग हैं। वह पहले बैलों, भैंसों और घोड़ों जैसे पशुओं का खुर काटने का काम करते थे। उसकी मम्मी घर में ही बैठने वाला मुंढ़ा बनाती थीं। अब हुसैन फाइनेंस का काम करता है। हुसैन आर्थिक रूप से पहले से थोड़ा बेहतर हो गया था जिससे बजरंग दल से जुड़े गांव के कुछ लोग उसे अपना प्रतिद्वंद्वी समझने लगे थे। उन्होंने आरएसएस और भाजपा की मुस्लिम विरोधी साम्प्रदायिक राजनीति का इस्तेमाल कर हुसैन को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। 
    
सबसे पहले 2 जुलाई को फोन कर हुसैन के घर वालों के साथ गाली-गलौज करने वाला प्रदीप बजरंग दल से जुड़ा हुआ है। लड़की का भाई 3 जुलाई को पुलिस के साथ हुसैन के घर आता है किंतु यह बात स्पष्ट नहीं है कि पुलिस राजस्थान की थी या हरियाणा राज्य की। क्योंकि लड़की पूनम के घर वालों ने आसिन के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। यह मामला बजरंग दल द्वारा प्रायोजित हो सकता है। प्रदीप और सुशील वर्मा के उकसावे पर ही 5 जुलाई को हुसैन के घर 40-50 लड़कों की भीड़ इकट्ठा हुई थी। उस दिन हुसैन द्वारा पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर फोन करने पर पीसीआर की पुलिस उसके घर पहुंची लेकिन पुलिस ने भीड़ को भगाने की बजाय हुसैन को ही घर से भगा दिया। हुसैन जान बचाने के लिए अपने पूरे परिवार के साथ 5 जुलाई की शाम को ही अपना घर छोड़ दूसरे के घर शरण लेने के लिए चला गया था। अब दंगाइयों के लिए खुला मैदान था। दंगाई अपनी योजना के अनुसार सबसे पहले गांव की गौशाला में इकट्ठा हुए जिसे सुशील ही चलाता है। फिर गांव की बिजली काट दी गई तथा हुसैन के निजी सीसीटीवी कैमरे सहित ग्राम पंचायत के द्वारा लगाए गए सभी सरकारी सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया गया, उसके बाद हुसैन के घर पहुंच कर दंगाइयों ने सभी कीमती सामान व नगदी पर अपना हाथ साफ किया। इस प्रक्रिया में दोनों घरों का सामान एक-एक कर बाहर फेंककर, पेट्रोल डालकर उसमें आग लगाकर सब कुछ जला डाला। उसके बाद फायर ब्रिगेड और थाने की पुलिस हुसैन के घर पहुंची थी। इस मामले में क्या पुलिस अनजान थी? तथ्य ऐसा नहीं कहते हैं। 5 जुलाई की शाम को जब पुलिस ने हुसैन के परिवार को घर से भगाया तब तक पुलिस को सब कुछ पता हो चुका था। अगले एक-दो दिन में क्या होने वाला है, यह बात थानाध्यक्ष सहित थाने के सभी पुलिसकर्मियों को पता थी। 15 लोगों पर नामजद एफआईआर है लेकिन पुलिस ने केवल तीन लोगों को ही गिरफ्तार किया है। अगर पुलिस चाहती तो इन तीनों गिरफ्तार आरोपियों से सब कुछ उगलवा लेती। लेकिन पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया है। कुछ दिन बाद ही गिरफ्तार आरोपियों में से एक की जमानत हो गई है। इससे स्पष्ट है कि मुकदमा गंभीर धारा में दर्ज नहीं है। एसपी, डीएसपी सब छुट्टी पर थे, उनके सहायक-रीडर इतने बड़े मामले पर बात करने के लिए तैयार नहीं थे। तोशाम का थाना इंचार्ज ‘‘जांच डिस्क्लोज’’ नहीं करने के नाम पर कुछ नहीं बता रहा है। पुलिस ने कोई ठोस तथ्य नहीं एकत्रित किये, सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर अथवा कोई ऐसी सामग्री नहीं जुटाई है जिससे आरोपियों को अदालत में कठोर सजा दिलाई जा सके। इस मामले में पुलिस की मिलीभगत प्रतीत होती है।
    
हुसैन के परिवार के साथ हुई घटना उन तमाम घटनाओं में से एक थी जो मुस्लिम विरोधी सांप्रदायिक राजनीति के तहत योजनाबद्ध तरीके से सचेतन की जाती हैं। अतीत की तमाम घटनाओं में आरएसएस से जुड़े बजरंग दल तथा हिंदू महासभा जैसे तमाम हिंदू संगठन शामिल होते रहे हैं। वही संगठन हुसैन के मामले में भी शामिल रहे हैं। जिन  जिन राज्यों में भाजपा की सरकार होती है, उन राज्यों में कभी बीफ खाने के नाम पर, कभी लव जिहाद के नाम पर तथा कभी मंदिर-मस्जिद के नाम पर, कभी कुछ, कभी कुछ के नाम पर अक्सर मुसलमानों के खिलाफ हिंसक घटनाएं होती रहती हैं। भाजपा सरकार वाली राज्यों की पुलिस मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में मूक दर्शक बनी रहती है अथवा दंगाइयों की मदद करती हुई दिखती है। ढ़ाणी माहू गांव में हुसैन परिवार के साथ घटित हिंसा में भी ऐसा ही हुआ है। 

फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य
1. रामफल जांगड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता दिल्ली
2. एडवोकेट अफताब फाजिल, हाईकोर्ट, दिल्ली
3. एडवोकेट शबाना इद्रिसी, हाईकोर्ट दिल्ली 
4. सुमन जांगड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता, दिल्ली
5. मुन्ना प्रसाद, कार्यकर्ता इंकलाबी मजदूर केंद्र दिल्ली
6. विरेन्द्र सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता, दिल्ली
7. योगेश कुमार, कार्यकर्ता इंकलाबी मजदूर केंद्र दिल्ली
8. ओमप्रकाश, स्वतंत्र पत्रकार, दिल्ली

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