स्कूलों के मर्जर के विरोध में संघर्ष

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बरेली/ उत्तर प्रदेश सरकार कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 27,000 सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में 5000 स्कूल चिन्हित हो चुके हैं ये वे स्कूल हैं जहां छात्र संख्या 50 से कम है, लेकिन कहीं-कहीं 50 से अधिक संख्या वाले स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया है। ऐसे स्कूलों का भी विलय किया जा रहा है जिनके रास्ते में कोई नदी, नाला, हाइवे, रेलवे ट्रैक आता हो। 
    
मर्जर (विलय) की यह प्रक्रिया पूरे देश में विशेषकर भाजपा शासित राज्यों के सरकारी प्राइमरी/जूनियन स्कूलों में चल रही है। उत्तर प्रदेश में मर्जर के नाम पर सरकारी विद्यालयों को बंद करने के विरोध में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन (क्रालोस) की बरेली इकाई ने विभिन्न प्राइमरी और जूनियर शिक्षक संघों को एक मंच पर आकर इसका प्रतिरोध करने का आह्वान किया। क्योंकि बरेली जिले में भी इस मर्जर प्रक्रिया के तहत 617 स्कूल चिन्हित किए गये हैं। क्रालोस की पहल पर 29 जुलाई को गांधी उद्यान में एक बैठक आयोजित की गयी जिसमें उ.प्र. प्राथमिक शिक्षक संघ, उ.प्र. जूनियर शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन, उ.प्र. विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ, टी.एस.सी.टी., उ.प्र. प्राथमिक महिला शिक्षक संघ, अटेवा, एस.सी./एस.टी. बेसिक टीचर बेलफेयर एसोसिएशन, बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इमके के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि उ.प्र. सरकार की बेसिक और जूनियर स्कूलों की मर्जर की योजना शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009  का खुला उल्लंघन है जिसमें धारा-6 के तहत स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि न्यूनतम 300 की आबादी में और 1 किमी. के दायरे में प्राथमिक विद्यालय स्थापित होगा। यह संविधान के अनु. 21 ए के तहत शिक्षा के मौलिक अधिकार का तथा नीति निर्देशक तत्व के अनु. 46 का भी स्पष्ट खुला उल्लंघन है जो अनु. जातियों, जनजातियों और अन्य कमजोर वर्ग के लोगों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देने पर बल देता है। 
    
बैठक में कहा गया कि केन्द्र की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा के निजीकरण का खाका तैयार करके बचे-खुचे सरकारी शिक्षा संस्थानों, स्कूलों-कॉलेजों को भी निजी संस्थानों के हाथों में सौंप देने का प्रावधान किया है। इस नीति के तहत क्लस्टर विद्यालय के नाम पर स्कूलों का मर्जर किया जा रहा है। एनईपी 2020 के अनुसार हर बड़े सरकारी माध्यमिक स्कूल के आस-पास आने वाले प्राथमिक/उच्च प्राथमिक और आंगनबाड़ी सहित स्कूलों को एक स्कूल काम्प्लेक्स के रूप में जोड़़ा जाएगा। यह स्कूल काम्प्लेक्स 5-10 किमी. के दायरे में स्थित स्कूलों को समेट लेगा। 
    
बैठक में मर्जर से उत्पन्न स्थिति पर विचार किया गया। मर्जर से बंद हुए स्कूल के कारण गरीब बच्चों खासकर लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हजारों की संख्या में स्कूल बंद होने से शिक्षकों के पद खत्म हो जाएंगे। रसोइया, शिक्षामित्र, अनुदेशक सभी पद समाप्त हो जाएंगे। 
    
सभी संगठनों ने मर्जर का विरोध करने के लिए एकमत होकर एक मोर्चे का गठन किया जिसका नाम शिक्षा बचाओ संघर्ष मोर्चा रखा गया। बैठक में इस मोर्चे के बैनर तले दो कार्यक्रम लिए गये। पहला कार्यक्रम 4 जुलाई को बाइक रैली का और दूसरा 8 जुलाई को सभा और ज्ञापन का था।
    
शिक्षा बचाओ संघर्ष मोर्चा ने बाइक रैली के लिए व्यापक तैयारी की और 4 जुलाई को 20 किमी. लंबे रूट पर लगभग 1200 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी-छात्रों ने उ.प्र. सरकार की मर्जर की नीति के खिलाफ नारे लगाते हुए विशाल बाइक रैली निकाली। बाइक रैली में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाएं-छात्र-कर्मचारी सरकार की मर्जर नीति के विरोध में तख्तियां हाथों में लिए थे जिस पर- यह मर्जर नहीं मर्डर है, शिक्षा है सबका अधिकार, बंद करो इसका व्यापार, गरीब बच्चों से शिक्षा मत छीनो, शिक्षा का निजीकरण बंद करो आदि नारे लिखे थे। इस विशाल बाइक रैली का समापन गांधी उद्यान पर हुआ। इसके पश्चात 8 जुलाई के ज्ञापन कार्यक्रम के लिए योजना निर्धारित की गयी। 8 जुलाई को अन्य शिक्षक संगठन के कार्यक्रम और 9 जुलाई को हड़ताल का कार्यक्रम होने के चलते ज्ञापन कार्यक्रम के लिए 10 जुलाई की तारीख निर्धारित की गयी। दो शिक्षक संगठन- उ.प्र. प्राथमिक शिक्षक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा ज्ञापन कार्यक्रम से अपने को अलग रखा। इसके बावजूद शिक्षा बचाओ संघर्ष मोर्चा ने निर्धारित तिथि पर अपना ज्ञापन कार्यक्रम किया। सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में एक सभा की गयी। इस सभा को उ.प्र. जूनियर शिक्षक संघ के मण्डल अध्यक्ष डा. विनोद कुमार शर्मा, उ.प्र. प्राथमिक महिला शिक्षक संघ की जिला महामंत्री राखी सक्सेना, उ.प्र. विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डा. योगेश शर्मा, यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, क्रालोस के शहर सचिव फैसल, पछास के सचिव कैलाश और बरेली ट्रेड यूनियन फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने संबोधित किया। इसके पश्चात वहां से जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट तक मार्च करते हुए और नारे लगाते हुए गए वहां पर शिक्षा बचाओ संघर्ष मोर्चा ने तीन ज्ञापन- राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम, द्वारा जिलाधिकारी बरेली दिये। 
    
गरीब बच्चों के स्कूल बंद कर उनको शिक्षा से वंचित करने की लड़ाई लंबी चलेगी। क्योंकि यह शिक्षा के निजीकरण के विरुद्ध संघर्ष है जो नई आर्थिक नीतियों से जुड़ा हुआ है। सरकार के द्वारा जिस तरीके से निजीकरण-उदारीकरण की नीतियों को लागू किया जा रहा है और स्थाई रोजगार खत्म कर ठेका-संविदा-आउअसोर्सिंग के रोजगार दिए जा रहे हैं उसमें शिक्षा भी अछूती नहीं है। इसलिए इन आर्थिक नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने से ही इन नीतियों और इनको पोषित करने वाली पूंजीवादी व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है।                 -बरेली संवाददाता  

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