फासीवाद
प्रांतीय सरकारों को पंगु बनाने वाला फैसला
हिंदू राष्ट्रवादी अपनी फासीवादी मंशा को लगातार आगे बढ़ाते जा रहे हैं। जो विरोध या जो फैसले उनकी राह में रोड़े बनते हैं फिलहाल वे उन्हें भी हटाकर आगे बढ़ने में कामयाब हो जा र
आतंकवाद के नाम पर मजदूरों को आतंकित करने की कोशिश
दिल्ली लाल किले के पास विस्फोट और कश्मीर में हुई हालिया विस्फोट की घटना के बाद पूरे देश में आतंकवाद के नाम पर सरकार द्वारा आतंक कायम किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के खिलाफ
अजीत डोभाल की पलटी पड़ गई उलटी
बीती 10 नवम्बर को एक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी हुआ जिसमें देश के मुख्य सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल कह रहे हैं कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई ने मुसलमानों से ज्यादा
‘वन्दे मातरम्’ और भाजपा का साम्प्रदायिक एजेण्डा
केन्द्र की संघी भाजपा सरकार ने 7 नवम्बर, 2025 से अगले एक साल तक बंकिमचन्द्र चटर्जी द्वारा रचित गीत ‘वन्दे मातरम्’ की रचना के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम क
मुखौटे के पीछे असली चेहरा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को 2025 में सौ साल पूरे हो गए हैं। इस अवसर पर आरएसएस ‘100 इयर्स आफ संघ जर्नी : न्यू होराइजन्स’ नामक व्याख्यान श्रृंखला चला रहा है। इस एक साल में प
उत्तराखण्ड के 25 साल : पूंजीपति मालामाल - मेहनतकश जनता कंगाल
उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये। मोदी और धामी ने इस मौके को ऐसे रूप में पेश करने की कोशिश की मानो गंगा फिर से धरती पर अवतरित हो गयी हो। उत्तराखण्ड को बने 25 साल हो गये तो
दिल्ली विस्फोट : मोदी सरकार की विफलता
दिल्ली विस्फोट में 13 निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है। सरकार ने इस विस्फोट पर अपनी खुफिया विफलता स्वीकारने के बजाय हमेशा की तरह ‘दोषी बख्शे नहीं जायेंगे’ का राग छेड़ने का
नयी शिक्षा नीति के भूत-प्रेत
संघी ठीक इसी वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या उसका मन माफिक इस्तेमाल करते हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि आज की वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा वेदों में आधुनिक विज्ञान को नहीं ढूंढा जा सकता। इसी तरह आज की वैज्ञानिक पद्धति से प्राचीन भारत में परमाणु बम, मिसाइल या हवाई जहाज के अस्तित्व को नहीं प्रमाणित किया जा सकता। इसीलिए वे अपनी सुविधानुसार इस वैज्ञानिक पद्धति को नकारते हैं या तोड़ते-मरोड़ते हैं। और कोई चारा न होने पर ये सापेक्षिकतावादी या संदेहवादी रुख अख्तियार कर लेते हैं। आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिक पद्धति को संदेह के दायरे में लाकर ये अपनी बेसिर-पैर की बातों को जायज ठहराने का प्रयास करते हैं।
राष्ट्रीय
आलेख
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।