युवा मजदूर
घर से निकलते ही रुंधे गले से
मां ने पीछे से आवाज दी थी
रुक जा, मत जा मेरे लाल
शहर में कौन रखेगा तेरा खयाल,
क्या खायेगा? क्या पियेगा?
तुझे कुछ भी बनाना नहीं आता
घर से निकलते ही रुंधे गले से
मां ने पीछे से आवाज दी थी
रुक जा, मत जा मेरे लाल
शहर में कौन रखेगा तेरा खयाल,
क्या खायेगा? क्या पियेगा?
तुझे कुछ भी बनाना नहीं आता
अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर युद्ध थोपे जाने के बाद गैस-तेल संकट की वजह से औद्योगिक इलाकों में इन दिनों जो खामोशी पसरी है, वह सामान्य मंदी की नहीं, बल्कि गहरे संकट की नि
अक्सर ही सरकारें अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए और सरकार के खिलाफ हो रहे न्यायपूर्ण संघर्षों को दबाने के लिए दमनकारी कानूनों का इस्तेमाल करती हैं। इन काले कानूनों
चमचमाती दुनिया के पीछे और भी दुनिया है। वह दुनिया मजदूरों-किसानों की बदहाली की है। यह एक उजड़ती हुयी दुनिया है। पूंजीपतियों के मुनाफे के चक्कर में आज मजदूर-किसान बुनियाद म
यदि आप दूर अपने ड्राइंग रूम में बैठकर
युद्ध का मजा ले रहे हैं
आसमान से बस्तियों, स्कूलों और अस्पतालों पर
गिरती मिसाइलों का
आतिशबाजी की तरह आनंद ले रहे हैं
मैं पिछले 3 दिन में 2 बार गिरफ्तार हुआ। 13 मार्च को हम बवाना औद्योगिक क्षेत्र के बंगाली चौक पर मजदूरों से गैस की समस्या को लेकर बात कर रहे थे और उनको गैस की समस्या के लिए आंदोलन के लिए सूचित कर रहे
‘‘सफर कैसा रहा?’’ ट्रे में पानी का गिलास पेश करते हुए बीवी ने जानना चाहा। ‘‘हम्म सफर में तो खैर रही। धागा बांध दिया है। देखें कब खुदा मुराद बक्शे। शायद मेरी इबादत में को
सोशल मीडिया पर एक अफवाह उड़ी कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिलाओं के पहनावे को लेकर एक बयान दिया है। कि जो भी महिला या वयस्क लड़की फुहड़ कपड़े पहन कर घूमेगी उनका अकाउंट बं
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।