काश
काश यूं ही कोई बात हो जाये
सारे संसार के नक्शे एकाकार हो जायें।
दिशाओं का भ्रम भी टूट जाये,
पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण भी ना बचा रह जाये,
समुद्र का खारापन चखें सभी
काश यूं ही कोई बात हो जाये
सारे संसार के नक्शे एकाकार हो जायें।
दिशाओं का भ्रम भी टूट जाये,
पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण भी ना बचा रह जाये,
समुद्र का खारापन चखें सभी
वर्मा जी की सरकारी नौकरी उस समय लगी जब पांचवीं जमात फेल आदमी को भी सरकारी नौकरी मिल जाती थी। और प्रमोद का दाखिला उस समय सरकारी स्कूल में हुआ जब सरकारी कर्मचारियों के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना
रोम जल रहा था
नीरो बंशी बजा रहा था
हमारा नीरो बंशी नहीं
डमरू बजा रहा है।
जनता दूषित पानी पीकर मर रही है
वह ड्रम बजा रहा है
रूपया रसातल में जा रहा है
आजकल उत्तराखंड हिंदुत्व की प्रयोगशाला बना हुआ है। यहां लंपट, गुंडा तत्वों को हिंदुत्व के नाम पर गुंडागर्दी करने की खुली छूट मिली हुई है। कभी पूर्वोत्तर के छात्र एंजल चकमा
आधे घंटे से मेरे आंसू नहीं रुक रहे हैं। यह किसी वंशानुगत बीमारी की तरह लग रहा है। गला रुंध रहा है, छोटी हिचकियां उठ रही हैं। हिचकियां दबाने से गला दुखता है।
वो जुमला गढ़ते हैं कि
बेटी बचाओ? बेटी पढ़ाओ?
मकसद साफ है
पहले बेटी तो बचाओ तभी तो पढ़ाओगे।
हर जगह नजर है उनकी हमारी बेटियों पर
कैसे और कहां तक छुपाओगे?
हाल ही में मोदी सरकार ने मनरेगा ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खत्म कर विकसित भारत जी राम जी बिल संसद के दोनों सदनों से पास कराकर राष्ट्रपति से हस्ताक्षर करा लिए हैं और अ
हिन्दू समाज महिलाओं-बच्चियों को देवी के रूप में आदि काल से पूजता आ रहा है। नेपाल में भी बड़ी संख्या में हिन्दू आबादी रहती है। यहां भी प्राचीन काल से हिन्दू देवी तलेजू के अ
आज के समाज में जातिवाद की जड़ें गहरी मिट्टी में गड़ी हैं। इनकी जड़ों को समूल नष्ट करने के लिए कई समाज सुधारकों-क्रांतिकारियों-समाज सेवकों ने अपने सारे जीवन को लगा दिया पर जा
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।