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यौन हिंसा और उसके खिलाफ फूटा आक्रोश

यौन हिंसा के खिलाफ आक्रोश

सख्त कानून, कठोर सजा, पुलिस का खौफ जैसी चीजें यौन हिंसा के समाधान में इंच भर भी असर नहीं डालती हैं क्योंकि इन सभी तौर-तरीकों में उस जमीन को कभी निशाना नहीं बनाया जाता है जहां से ऐसे क्रूर अपराधी बार-बार जन्म लेते हैं। यह जमीन अपराधियों को बार-बार जन्म देती है परन्तु समाधान के तौर पर अपराधी का खात्मा जमीन का खात्मा नहीं साबित होता है। इस वक्त पूरे देश में फूटे जनाक्रोश में भी इस बात को देखा जा सकता है। 

सच में ! बस अब बहुत हुआ !

राष्ट्रपति मुर्मू का बयान

‘‘बस, अब बहुत हुआ’’ राष्ट्रपति मुर्मू का बयान हर अखबार के फ्रंट पेज पर छपा। जो खूब चर्चा का विषय बना। 
    

मसखरे लड़के और योगी सरकार

लखनऊ में महिला के साथ बदतमीजी

पिछले दिनों बारिश के कारण लखनऊ शहर के ठीक बीचों बीच, प्रसिद्ध ताज होटल के अंडरपास में पानी भर गया। पानी के भरने पर कुछ 20-22 साल के नौजवान आते-जाते लोगों पर पानी उछालने ल

मोदी फजीहत से बचे पर कब तक..

महिला पहलवान विनेश फोगाट ओलंपिक मेडल जीतते-जीतते रह गयीं। 50 किलो भार वर्ग में 100 ग्राम वजन ज्यादा होने से उन्हें फाइनल में पहुंचने के बाद भी अयोग्य करार दिया गया। ये वह

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

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जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

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हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

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दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।