आज का नीरो

Published
Mon, 02/16/2026 - 06:00
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रोम जल रहा था
नीरो बंशी बजा रहा था
हमारा नीरो बंशी नहीं
डमरू बजा रहा है।
जनता दूषित पानी पीकर मर रही है
वह ड्रम बजा रहा है
रूपया रसातल में जा रहा है
नीरो हनुमान की पतंग बनाकर 
आसमां में उड़ा रहा है।

लोग बेटियों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं
वह हवा में त्रिशूल लहरा रहा है
बस्तियों पर बुलडोजर चल रहा है
वह पल पल में शूट बदल रहा है।

नीरो रट लगा रहा है
सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास
जुमले का सच सब समझ रहे हैं
कौन कौन हैं नीरो के खास
जल जंगल जमीन, सब मित्रों के नाम
जनता विरोध करे तो उसका काम तमाम।

नीरो एक मंझा हुआ ड्रामेबाज है
यही उसकी सफलता का राज है
उसने वादा किया था
जहां झुग्गी वहीं पक्का मकान होगा
हम समझ ही नहीं पाये
कि जहां आज बस्ती है
कल वहां शमशान होगा।

ऐसा नहीं है कि
नीरो हमारी दुश्वारियों से अन्जान है
सब जानता है उसे सबका भान है
जनता की जेबें काटकर
सेठों की तिजोरियां भरना
वह बखूबी जानता है
इसीलिए तो लुटेरों का चहेता है लुटेरों की जान है।
        -भारत सिंह, आंवला
 

आलेख

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