छत्तीसगढ़, राजस्थान, म.प्र. - किसानों को उजाड़ती सरकार

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आजकल मोदी सरकार घमंड में चूर है। 2024 के आम चुनाव की बुरी गत से उबर कर वह अपने को अजेय समझने लगी है। इसीलिए वह मजदूरों-किसानों पर रोज नये-नये हमले बोलकर पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाने में जुटी है। आम जनता की नाराजगी का भय संघ-भाजपा को नहीं बचा है। या वे सोचते हैं कि चुनावी तीन तिकड़म, हिन्दू-मुसलमान कर वे नाराजगी को मिटा देंगे। 
    
राजस्थान के हनुमानगढ़ में एशिया की सबसे बड़ी एथेनॉल फैक्टरी लगाने की कवायद का बीते 15 माह से किसान विरोध कर रहे हैं। किसान आशंकित हैं कि इस फैक्टरी से उनके खेतों की उर्वरता व हवा-पानी दूषित हो जायेंगे। ऐसे में सरकार लाठी-गोली-मुकदमों से किसानों के न्यायपूर्ण संघर्ष को कुचल रही है। 10-11 दिसम्बर को किसानों की महापंचायत पर ऐसे लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले बरसाये गये मानो पुलिस सीमा पर जंग लड़ रही हो। इसके बाद ढेरों किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया। किसानों ने भी हिंसक हो फैक्टरी को नुकसान पहुंचाया। अब सरकार दमन और तेज कर रही है। 
    
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कोयला खदान विस्तार का गांववासी विरोध कर रहे हैं। खदान विस्तार हेतु ढेरों गांव वालों को अभी तक मुआवजा तक नहीं दिया गया। ऐसे में यहां भी जब पुलिस ने किसानों को जबरन बलपूर्वक हटाने की कोशिश की तो किसान भी उग्र हो उठे। फिर यहां भी दमन तेज कर दिया गया। 
    
म.प्र. के सिंगरौली में लाखों पेड़ काट जंगल उजाड़ सरकार अडाणी के विद्युत उत्पादन संयत्र को बढ़ावा देना चाहती है। इसका यहां के आदिवासी-ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। यहां भी सरकार उनका दमन कर जबरन लोगों को खदेड़ रही है। 
    
जगह-जगह भाजपा सरकारों का बुलडोजर जहां गरीब मेहनतकशों के सालों पुराने आवास उजाड़ रहा है वहीं देहातों में सरकार किसानों पर हमलावर है। शायद सरकार के ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा असल में ‘सबका विनाश कुछ का विकास’ था। अब मजदूरों-किसानों-आदिवासियों सबको यह विकास नजर आ रहा है। उनको उजाड़ कर उस विकास को बसाया जा रहा है जिस पर अडाणी-अम्बानी का नियंत्रण है। 
    
ऐसे में इस ‘विकास’ का मुकाबला करना वक्त की जरूरत है। 

आलेख

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जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

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ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

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गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि