तुम जादू की तरह गायब हो गये
चप्पे-चप्पे पर कैमरे लगे हैं लेकिन
दिल्ली पुलिस तुम्हें ढूंढ नहीं पायी
उमर खालिद तुम जेल में बंद हो
तुम्हारी बेल पर सुनवायी नहीं हो पा रही है
दिल्ली पुलिस आठ साल तक नजीब अहमद को ढूंढती रही
दुखी मन से भारत की अदालत ने तुम्हारी फाइल बन्द कर दी
वह लोग जो तुम्हारे गायब होने से पहले तुम्हारे घर आये थे
तुम्हारी फाइल बन्द होने से पहले बहुत तरक्की कर गये होंगे
उन पुलिस वालों ने भी तरक्की कर ली जो तुम्हें ढूंढ नहीं पाये
और अदालत ने भी मुकदमों के बोझ से एक लकड़ी कम कर दी
बहस अभी जारी है कि भारत में लोकतंत्र है या तानाशाही
बहस इस बात को लेकर भी है कि इसे तानाशाही कहें या फासीवाद
तुम्हारे चले जाने से लोकतंत्र पर कोई फर्क नहीं पड़ा
न ही उमर खालिद के जेल में पड़े रहने से कोई फर्क पड़ता है
फर्क इससे भी नहीं पड़ता कि जज का बंग्ला ......
-इबलीस, फरीदाबाद