नया गेमिंग बिल : हाथ में चाकू थमा खून बहना रोकने का दावा

/new-gaming-bill-haatha-mein-chaakoo-thama-khoon-bahana-rokane-kaa-dava

मोदी सरकार ने बीते दिनों आनन-फानन में संसद में बगैर चर्चा किये नया गेमिंग बिल पारित कर कानून बनवा दिया। इस बिल के चलते आनलाइन गेमिंग की ड्रीम-11 से लेकर अन्य कम्पनियां एक झटके में सकते में आ गयीं। उन्हें तात्कालिक तौर पर अपना धंधा बंद कर देना पड़ा। 
    
मौजूदा कानून के तहत सरकार ने आनलाइन गेमिंग के नाम पर हर तरह की सट्टेबाजी जुआखोरी को प्रतिबंधित कर दिया है। सरकार के इसके पीछे नैतिक पतन, बच्चों को लत लगने, घर की सारी दौलत लुटाने सरीखे कारण बताये हैं। यानी अब किसी खेल पर आनलाइन सट्टा नहीं लगाया जा सकता। इसी तरह ड्रीम-11, फैंटेसी-11 सरीखे क्रिकेट के खेल में टीम बनाने व खिलाड़ियों के प्रदर्शन आंकने पर जुआ खेलने, पोकर सरीखे गेम में पैसा लगाने पर रोक लग गयी है। 
    
जहां सरकार ने आनलाइन सट्टेबाजी- जुये पर रोक की बात की है वहीं ई-स्पोर्टस को बढ़ावा देने की बात कही है। यानी अब इण्टरनेट पर गेमिंग कम्पनियां ऐसी खेल प्रतियोगिता आयोजित कर सकती हैं जिसमें भागीदार अपनी बुद्धि व कौशल से खेल कर प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकता है। इन प्रतियोगिताओं में भागीदार से प्रवेश शुल्क व विजेताओं को इनाम दिया जा सकेगा। सरकार इन ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के भांति-भांति के उपाय करेगी। 
    
ड्रीम-11 सरीखी जुआखोरी पर रोक और आनलाइन ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देकर व इसके लिए आनलाइन लेन-देन को छूट देकर सरकार जुआ और सट्टा कैसे रोक पायेगी, यह बात इस कानून से स्पष्ट नहीं होती। 
    
2014 में मोदी के आने और जियो द्वारा मुफ्त डाटा देने के बाद से आनलाइन सट्टेबाजी-जुआखोरी में तेज बढ़ोत्तरी हुई थी। रातों-रात कई कम्पनियां करोड़ों में खेलने लगी थीं। ड्रीम-11 तो भारतीय क्रिकेट टीम की प्रायोजक भी बन गयी थी। इसमें और उछाल लोगों के हाथ में एण्ड्रायड फोन आने और यूपीआई भुगतान से आया। अब करोड़ों लोग हाथ में मोबाइल लिए आईपीएल मैचों से पहले टीम बनाते-सट्टा लगाते दिखने लगे। ढेरों लोग अपनी सारी कमाई लुटा कंगाल होने लगे। ऐसे में किसी क्रिकेट मैच पर सट्टा इतना अधिक होने लगा कि खेल को व खिलाड़ी को भी खरीदा जाने लगा। इतने फलते-फूलते धंधे को एक झटके में मोदी सरकार अगर रोकने का बिल ले आयी तो इसकी निश्चित वजहें हैं।
    
पहला तो मोदी सरकार नैतिकता का दिखावा-पाखण्ड कर खुद को सट्टेबाजी का विरोधी दिखाना चाहती है। वह भूल जाती है कि इस सट्टेबाजी की लत की ओर उसी ने युवाओं को धकेला। दूसरा, संभावना जतायी जा रही है कि लाटरी व सट्टेबाजी के अन्य गैर कानूनी नेटवर्क जो पहले गुपचुप तरीके से संचालित होते थे, इस दौरान काफी कमजोर हो गये थे, उन्हें बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। वैसे भी लाटरी किंग मार्टिन द्वारा डीएमके व भाजपा को मोटे चंदे देने की बातें पहले भी आती रही हैं। अभी पूरी तरह कारण स्पष्ट नहीं है कि अपने पैदा किये सट्टे के बड़े खेल को मोदी सरकार क्यों लगाम लगा रही है। वक्त के साथ इसके पीछे के असली मंसूबे सामने आयेंगे। 
    
कारण कुछ भी हो, ई स्पोर्ट्स को बढ़ावा देकर व उस हेतु लेन-देन को बढ़ावा देकर मोदी सरकार वह चाकू लोगों के हाथों में थमा रही है जिसके जरिये लोग अपनी दौलत दांव पर लगा खून बहायेंगे ही। सट्टेबाज कम्पनियां नाम-रूप बदलकर फिर लोगों को बेवकूफ बनाने को मैदान में उतरेंगी और अब उसे ई-स्पोर्ट्स का सभ्य नाम दिया जायेगा। 
    
पूंजीवाद में झटके में अमीर बनने का लालच और जिंदगी में पैदा होती तंगहाली, इन लुटेरी कंपनियों के चंगुल में लोगों को ढकेलेंगी ही। लोगों की छोटी-छोटी कमाई ये कंपनियां हड़प लेंगी। इस लूट को बढ़ाना मोदी सरकार की नीति रही है अब वह लूट बढ़ाकर नैतिकता का पाखण्ड भी करेगी। 

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि