सरकार रोजगार को बढ़ावा देने के लिये तरह-तरह की योजनायें लाती रहती है। खासकर ऐसी योजनायें जिससे पूंजीपतियों को भी लाभ मिल सके। जैसे स्प्री स्कीम (ैच्त्म्म् ैब्भ्म्डम्), प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना, पी.एम. गरीब कल्याण योजना, आत्मनिर्भर रोजगार योजना। अब एक और नई योजना सरकार लाई है- प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना।
2014 के बाद से वर्तमान तक मजदूरों के नाम पर जितनी भी योजनायें निकली हैं वो वास्तव में नियोक्ताओं के लाभ के लिये निकली हैं।
पी.एम.वी.बी.वाई. (च्डटठल्) योजना अगस्त 2025 से प्रभावी की गई है। इस योजना को फरवरी 2025 के बजट में प्रकाशित किया गया था। इस योजना के प्रचार-प्रसार के लिये सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किये। अफसरों की ड्यूटी लगाई गई। जगह-जगह पोस्टर लगाये गये, इश्तेहार दिये गये, रेडियों व टेलीविजन में बड़े-बड़े विज्ञापन प्रकाशित व प्रचारित कराये गये।
इस योजना में नये भर्ती कर्मचारी को एक साल में ज्यादा से ज्यादा सरकार द्वारा रु. 15000/- दिये जायेंगे, वह भी दो अलग-अलग किस्तों में। पहली किस्त 6 महीने बाद और दूसरी किस्त 12 महीने बाद।
इसी तरह नियोक्ता को भी सरकार से एक कर्मचारी रखने पर 36,000/- (3000रु. प्रति माह) रुपये मिलेंगे। यहां देखने वाली बात यह है कि इस योजना में सरकार नियोक्ता को लगभग ढाई गुना फायदा पहुंचा रही है। इसे तालिका के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं। कर्मचारी भविष्य निधि (म्च्थ्) में जमा की जाने वाली धनराशि (ब्वदजतपइनजपवद) तीन भागों में जमा होती है। म्च्थ् में कुल 25 प्रतिशत जमा होता हैः- (देखें तालिका)
इस योजना के तहत पूंजीपतियों को पूरे पी एफ योगदान से भी ज्यादा पैसा सरकार दे रही है। और यह एक या दो महीने के लिये नहीं बल्कि कम्पनियों को 2 साल के लिये और फैक्टरी के लिये 4 साल के लिये। पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने में इससे भी सरकार का मन नहीं भरता तो पूंजीपतियों को और अधिक फायदा कैसे पहुंचाया जाये भाजपा सरकार 18-18 घंटे इस पर काम करती है। और फिर एक नयी योजना लाती है। कर्मचारी नामांकन योजना 2025।
1 नवम्बर, 2025 से कर्मचारी नामांकन योजना 2025 शुरू हुई। यह योजना उन कर्मचारियों के लिये है, जो कर्मचारी पहले से किसी कम्पनी या फैक्टरी में काम कर रहे हैं और उन्हें पी.एफ. का सदस्य नहीं बनाया गया है। इस योजना के अंतर्गत वो सभी कर्मचारी आयेंगे जो 1 जुलाई, 2017 से 31 अक्टूबर, 2025 तक काम कर रहे हैं। इस योजना में कर्मचारी का अंशदान माफ किया गया है और नियोक्ता को केवल अपना हिस्सा, ब्याज और प्रशासनिक शुल्क ही देना होगा। पूरे प्रतिष्ठान के लिये केवल 100/- नाम मात्र का जुर्माना देना होगा।
इस तरह के कर्मचारियों को भी पी.एम.वी.बी.वाई. के तहत नियोक्ता को प्रोत्साहन राशि भी दी जायेगी। एक समय में ऐसे नियोक्ताओं पर जुर्माना व ब्याज की राशि वसूल की जाती थी और साथ ही न्यायालय में केस दायर किये जाते थे। लेकिन आज सरकार ऐसे नियोक्ताओं को प्रोत्साहन राशि दे रही है।
क्या इस तरह के कर्मचारी जुलाई 2017 से काम नहीं कर रहे थे। क्या इन्हें नवम्बर 2025 में नौकरी मिली है। इन दोनों ही सवालों का जवाब है, नहीं। लेकिन इस योजना के अनुसार पी एफ सदस्य बनने से सरकार कह सकेगी कि सरकार ने करोड़ों लोगों को रोजगार दिया है। सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिये हर सम्भव प्रयास कर रही है। चाहे वो गलत हो या सही।
इस योजना में भी सरकार नियोक्ता को प्रोत्साहन राशि दे रही है। यदि नियोक्ता 5 कर्मचारियों को पी.एफ. का सदस्य बनाता है तो सरकार उसे 2 साल में 3,60,000/- रुपये की प्रोत्साहन राशि देगी और इसी को यदि हम फैक्टरी में देखते हैं तो ये राशि दोगुनी हो जाती है, मतलब 4 वर्ष में 7,20,000/- रुपये।
एक तरफ सरकार जन कल्याणकारी योजनायें बंद कर रही है और रोजमर्रा की उपयोग में आने वाली चीजें महंगी कर रही है। गैस की सब्सिडी बंद कर दी, स्कूल बंद किये जा रहे हैं। एक समय में जनता को बहुत सारी चीजों पर सब्सिडी मिलती थी। उन सभी को भाजपा सरकार धीरे-धीरे बंद करती जा रही है। आटा, दाल, चावल, तेल, दूध-सब्जियों के दाम दिन ब दिन आसमान छू रहे हैं। कभी प्याज महंगी तो कभी टमाटर। डीजल, पेट्रोल, गैस की बात ही करना बेकार है।
सरकार चीजों पर 100 रुपये बढ़ाती है जनता के विरोध के बाद 10 रुपये कम करती है। और इस तरह 10 रुपये कम करने को जनता को फायदा देने के रूप में दिखने के लिये प्रचार में लाखों रुपये पानी की तरह बहाये जाते हैं। ऐसा देश है मेरा, ऐसी सरकार है मेरी।