समझौते के बाद विश्वविद्यालय के मजदूरों का आंदोलन स्थगित

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पंतनगर/ 15 अप्रैल 2025 को ट्रेड संयुक्त मोर्चा से जुड़ी यूनियन पंतनगर कर्मचारी संगठन पंतनगर, वि.वि.श्रमिक कल्याण संघ पंतनगर, राष्ट्रीय सफाई मजदूर कांग्रेस पंतनगर, देवभूमि उत्तराखंड सफाई मजदूर संघ पंतनगर, ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, राष्ट्रीय शोषित परिषद पंतनगर के साथ  प्रशासन से वार्ता में हुए समझौते के बाद सुरक्षाकर्मियों के आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की गयी। समझौते में निकाले गए सुरक्षाकर्मियों को काम पर रखने, पंजीकरण-वर्दी की राशि को कम करने, अन्य ठेका मजदूरों की भांति सुरक्षाकर्मियों को वर्ष में 11 दिनों का सवैतानिक अवकाश दिए जाने, सफाईकर्मियों को नगर निकाय के शासनादेश के अनुसार मजदूरी देने, मृतक आश्रितों को नौकरी दिए जाने पर आश्वासन दिया गया। मजदूरों ने अपने नेताओं के बीच मिठाइयां बांट, सिर में पगड़ी बांधकर खुशी जाहिर की।
    
पंतनगर वि.वि. में सुरक्षाकर्मियों ने 4 मार्च 2025 से अपनी निकाला-बैठाली और नये कर्मियों की भर्ती, निःशुल्क पंजीकरण वर्दी और 23 सुरक्षाकर्मियों की कार्यबहाली की मांग के लिए आंदोलन शुरू किया था। 150-200 सुरक्षाकर्मियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर सामूहिक रूप से हस्ताक्षर पत्र दिया गया था। हस्ताक्षर पत्र की प्रति उप श्रमायुक्त ऊधम सिंह नगर सहित सभी मजदूर यूनियनों को भी दी गयी थी। पंतनगर की मजदूर यूनियनों के ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा द्वारा आंदोलन का समर्थन करते हुए मांगों पर समाधान नहीं होने पर 1 अप्रैल 2025 को नोटिस देकर 15 अप्रैल से अनिश्चितकालीन आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी। जिसमें हाईकोर्ट नैनीताल के आदेशानुसार मजदूरों को नियमितीकरण किए जाने समेत 28 सूत्रीय मांगें रखी गई थीं।
    
पंतनगर में सभा हो या फिर जुलूस  आंदोलन सबमें शासन-प्रशासन द्वारा भारी पुलिस फोर्स लगाकर मजदूरों को डराने-धमकाने, आंदोलन का दमन करने का ही इतिहास रहा है। इसी क्रम में 17 मार्च को मजदूरों को जुलूस नहीं निकालने दिया गया। पुलिस प्रशासन और मजदूरों की भिड़ंत के बाद मजदूर गांधी मैदान में बैठ गये। वार्ता के बाद पहुंचे मजदूर नेताओं के समझाने पर ही मजदूर माने। मजदूरों के आक्रोश को देखते हुए आंदोलन के दबाव में सुरक्षा गार्डों के साथ अभद्रता, गाली-गलौच करने वाले सुरक्षा अधिकारी को पद से तो हटा दिया पर  मजदूरों को फिर भी काम पर नहीं रखा गया था। बल्कि मजदूरों की जायज़ मांगों को उठाने पर प्रशासन द्वारा दो मजदूर नेताओं का स्थानांतरण कर दिया गया। प्रशासन किसी तरह की विरोध की आवाज सुनने को तैयार नहीं था।
    
पंतनगर की मजदूर यूनियनों को स्थानीय स्तर पर मजदूरों का भरोसा जीतना होगा और इलाके के मजदूर संगठनों के साथ इलाकाई स्तर पर मजदूरों से भाईचारा, एकता कायम करनी होगी। मजदूरों की व्यापक एकता के दम पर ही मजदूरों का आंदोलन सफल हो सकता है, मांगें हासिल हो सकती हैं। मजदूर विरोधी फासीवादी तानशाह सरकारों को पीछे धकेला जा सकता है। -पंतनगर संवाददाता
 

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