मजदूर की जान लेने वाले डाक्टर का क्लिनिक सीज

/majdoor-ki-jaan-lene-vaale-doctor-ka-clinic-seize

हरिद्वार/ सिडकुल, हरिद्वार के हिन्दुस्तान यूनिलीवर कम्पनी के श्रीचन्द मजदूर के हाथ में फ्रेक्चर हुआ था। रॉड पड़ी थी। उसका इलाज रानीपुर मोड़ के प्राईवेट सिटी अस्पताल में चल रहा था। हत्यारा डाक्टर भी उसी में कार्यरत था। उसने कहा कि आपरेशन करना होगा। रॉड जो लगी है उसे निकालने के लिए अस्पताल में ज्यादा खर्च आयेगा। हमारे निजी क्लिनिक पर चलो वहां तुम्हारा कम खर्च में आपरेशन कर दूंगा। मजदूर 5 सितम्बर की शाम को उसके निजी क्लिनिक पर गया। वहां डाक्टर ने उसका इलाज शुरू कर दिया, बताया जा रहा है कि बेहोशी की ओवर डोज से उसकी सांसें रुक गयीं। हत्यारे डाक्टर ने दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने के लिए जबरन बांउसरों को बुलाकर परिवार के सदस्यों के साथ हाथापाई और गाली-गलौज की। उन्हें जबरन बाहर कर दिया। दूसरे अस्पताल में जाते हुए मजदूर ने दम तोड़ दिया था। सुबह होते ही डाक्टर और उसका परिवार क्लिनिक व घर छोड़ भाग निकले। लेकिन बाउंसर और गार्ड की आक्रोशित भीड़ ने पिटाई कर दी और पुलिस के हवाले कर उन दोनों को थाने भेज दिया। पुलिस ने डॉक्टर के क्लिनिक और घर को सीज कर दिया।    
    
इस घटना का पता लगते ही कम्पनी के मजदूर, मजदूर संगठन, सामाजिक संगठन और राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता हत्यारे डाक्टर के घर के सामने धरने पर बैठ गये। मुआवजे और डाक्टर की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। सैकड़ों हिन्दुस्तान यूनिलीवर के मजदूर और तमाम संगठन सुबह से लेकर देर रात तक डटे रहे तब जाकर सिटी मजिस्ट्रेट और मृतक के भाई, यूनियन तथा संगठन के मध्यस्थता में 12 लाख मुआवजा दिलाने के लिए समझौता हुआ। 
    
मृतक परिवारजन को न्याय मिलने और मुआवजा दिलाने में हिन्दुस्तान यूनिलीवर के मजदूरों के अलावा संयुक्त मोर्चे से जुड़े फूड्स श्रमिक यूनियन प्ज्ब् व  सिमेंस वर्कर्स यूनियन ब् -ै, किर्बी श्रमिक कमेटी, कर्मचारी संघ सत्यम आटो, भेल मजदूर ट्रेड यूनियन व इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।
    
पूंजीवादी व्यवस्था ही हत्यारी है। जब तक मुनाफे पर टिकी ये लुटेरी व्यवस्था रहेगी। तब तक फैक्टरी-अस्पतालों आदि में मुनाफे की हवस के लिए पूंजीपति रोज मजदूरों को मौत के घाट उतारते रहेंगे। मजदूरों-मेहनतकशों को संगठित होकर आवाज उठाने के लिए आगे आना होगा। 
        -हरिद्वार संवाददाता

आलेख

/capital-dwara-shram-par-kiya-gaya-sabase-bhishan-hamala

मजदूर-कर्मचारी की परिभाषा में विभ्रम पैदा करने एवं प्रशिक्षुओं व कम आय वाले सुपरवाइजरों को मजदूर न माने जाने; साथ ही, फिक्स्ड टर्म एम्प्लायमेंट (FTE) के तहत नये अधिकार विहीन मजदूरों की भर्ती का सीधा असर ट्रेड यूनियनों के आधार पर पड़ेगा, जो कि अब बेहद सीमित हो जायेगा। इस तरह यह संहिता सचेतन ट्रेड यूनियनों के आधार पर हमला करती है। 

/barbad-gulistan-karane-ko-bas-ek-hi-ullu-kaafi-hai

सजायाफ्ता लंपट ने ईरान पर हमला कर सारी दुनिया की जनता के लिए स्पष्ट कर दिया कि देशों की संप्रभुता शासकों के लिए सुविधा की चीज है और यह कि आज शासक और मजदूर-मेहनतकश जनता अलग-अलग दुनिया में जी रहे हैं। 

/amerika-izrayal-ka-iran-ke-viruddha-yuddh

अमरीकी और इजरायली शासकों ने यह सोचकर नेतृत्व को खत्म करने की कार्रवाई की थी कि शीर्ष नेतृत्व के न रहने पर ईरानी सत्ता ढह जायेगी। इसके बाद, व्यापक जनता ईरानी सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए सड़क पर उतर आयेगी और अमरीकी व इजरायली सेनायें ईरान की सत्ता पर कब्जा करके अपने किसी कठपुतले को सत्ता में बैठा देंगी।

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।