रंग में भंग

Published
Sun, 03/01/2026 - 07:01
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पिछले दिनों नई दिल्ली में ‘इण्डिया ए आई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन पूरी रंगबाजी में हुआ। यह समिट अपने पहले दिन से ही अपनी खास शैली में प्रधानमंत्री मोदी के आत्म प्रचार, चोरी-चकारी की घटनाओं के साथ भारी अव्यवस्था, इस समिट के महानुभावों के कारण लगे सड़कों पर जाम, ‘गलगोटियाकरण’ और अंत में युवा कांग्रेस के ‘भारत-अमेरिका डील’ के खिलाफ अर्धनग्न प्रदर्शन के कारण बहुचर्चित रही। 
    
रंग में भंग डालने वाली दो घटनाएं ‘गलगोटियाकरण’ व ‘युवा कांग्रेस का अर्धनग्न प्रदर्शन’ थी। पहली घटना ने ‘इण्डिया ए आई इम्पैक्ट समिट’ को नंगा कर दिया तो दूसरी घटना में भारतीय राजनीति के चरित्र को नंगा किया। गलगोटिया विश्वविद्यालय को भारी फजीहत के बीच समिट से भागना पड़ा। और समिट के बाद मोदी जी ने ‘दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल परियोजना’ के चौथी बार के उद्घाटन के मौके पर अपनी भाषा का नंगापन दिखाया। बोले ‘जो कांग्रेस देश के सामने पहले से ही नंगी है उसे अपने कपड़े उतारने की क्या जरूरत है’। और फिर बात वहां तक पहुंची कि देश के राजा को पता ही नहीं कि वे नंगे हैं। बरहहाल हम्माम में सारे नंगे एक-दूसरे के नंगेपन की ओर इशारा करने लगे। 
    
वैसे देखा जाए तो गलगोटिया विश्वविद्यालय का अपराध उतना भी नहीं है जितना उसका शोर मचाया गया। बेचारों ने क्या किया? इतना ही किया कि चीनी रोबोटिक कुत्ते को अपने विश्वविद्यालय का उत्पाद बना दिया। उन्होंने तो चीनी सहायता से अपने विश्वविद्यालय का ए आई समिट में नाम चमकाने की कोशिश की। बेचारे पूरे देश को झांसा देते उससे पहले उनकी पोल खुल गई। 
    
यही काम तो मोदी जी भी कर रहे हैं। जिस रैपिड रेल का मोदी जी ‘‘चौथी बार उद्घाटन’’ कर रहे थे वह भी चीनी कम्पनी की सहायता से बन रही है। 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल मार्ग का निर्माण जितने टुकड़ों में हुआ उतने टुकड़ों का मोदी जी ने उद्घाटन किया। इस तरह अपने प्रचार की भूख का नंगा प्रदर्शन किया। गलगोटिया ने चीनी रोबोट को अपना बता कर पेश किया तो मोदी जी चीनी, फ्रांसीसी और जर्मन साम्राज्यवादियों के पैसे व तकनीक से बनने वाली रैपिड रेल को अपनी महान उपलब्धि बता रहे हैं। 
    
हकीकत यही है कि जिस काम के लिए गलगोटिया की सामाजिक रूप से थू-थू हुयी ठीक उसी काम के लिए किसी ने मोदी जी को एक शब्द नहीं कहा।
    
‘इण्डिया ए आई इम्पैक्ट समिट’ में आने वाले विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व एकाधिकारी घरानों की दिलचस्पी भारत की ए आई उपलब्धियों पर नहीं थी। हर किसी को पता है कि भारत के शासकों ने भारत को कहां खड़ा किया हुआ है। भारत में दिलचस्पी की वजह भारत का विशाल बाजार और अमूल्य डाटा भण्डार है। और इसके लिए पश्चिम साम्राज्यवादियों खासकर अमेरिकी कम्पनियों के बीच काफी होड़ है। भारत की कम्पनियां ए आई दौड़ में बहुत पीछे खड़ी हैं। वे गलगोटिया विश्वविद्यालय की तरह के ही कारनामों के जरिये अपने ‘ए आई टूल्स’ विकसित कर रही हैं। ये ‘ए आई टूल्स’ अल्प विकसित और अल्प लोकप्रिय हैं। 
    
‘इण्डिया ए आई इम्पैक्ट समिट’ के आयोजन से मोदी जी ने चाहा था कि उनकी प्रसिद्धी में चार चांद लग जायेंगे पर हो गया उलटा। गलगोटिया के रोबोटिक कुत्ते और यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन ने महफिल लूट ली। खिसयानी बिल्ली खम्बा नोंचे के अंदाज में मोदी जी ने कांग्रेस, राहुल का जो भला-बुररा कहा उसने कांग्रेस और राहुल को मुफ्त में बड़ा प्रचार कर दिया। मोदी जी का ‘मेक इन इण्डिया’ का शेर ढेर हो गया तो राहुल के ‘‘बब्बर शेर’’ छा गये।  

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