महामहिम ! परजीवी कौन हैं?
बीते दिनों भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों ने मुफ्त सुविधाओं की घोषणाओं पर प्रश्न उठा दिया। न्यायमूर्ति गवई व एजी मसीह ने बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार स
बीते दिनों भारत के सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों ने मुफ्त सुविधाओं की घोषणाओं पर प्रश्न उठा दिया। न्यायमूर्ति गवई व एजी मसीह ने बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार स
आज भारत में राष्ट्रवादियों की एक ऐसी जमात मौजूद है जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहती है। इन राष्ट्रवादियों को हिंदू राष्ट्रवादी कह सकते हैं। इन हिंदू राष्ट्रवादियों के
हमारे देश में राष्ट्रवादियों की भरमार है। जो सबसे ज्यादा पाये जाते हैं वे हिन्दू राष्ट्रवादी हैं। कहा जाता है कि राष्ट्रवादी वे होते हैं जो राष्ट्र की चिंता करते हैं। राष
ट्रम्प से लेकर संघ तक सब ‘वोकिज्म’ (Wokeism) से परेशान हैं। ट्रम्प अपने यहां इसे खतरा बताता है तो संघ भारत में इसे खतरा बताता है। दोनों को एक ही चीज परेशान कर रही है। दोन
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2014 में केन्द्र में सत्तानशीन होने के बाद हिन्दू फासीवादी भारतीय सेना में लगातार घुसपैठ करते चले गये हैं। हिन्दू फासीवादियों की सरकार ने प्र
2 जनवरी 2025, बुधवार को जर्मनी के बवेरिया प्रांत के छोटे से शहर आशफेनबुर्ग के मध्य स्थित एक सार्वजनिक पार्क में एक चौंकाने वाली दुर्घटना हुई। यह दुर्घटना स्थानीय समय के अ
मुस्लिम विरोध भाजपा व आर एस एस की विचारधारा के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। सत्ता में आने के लिए व सत्ता में बने रहने के लिए वह मुस्लिम विरोध की राजनीति का इस्तेम
उत्तराखण्ड देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला दूसरा (आजादी के बाद पहला) राज्य बन गया है। इससे पूर्व गोवा में पुर्तगाली नागरिक संहिता लागू थी। संघी मुख्यमंत्री इसके
दिल्ली विधानसभा चुनावों में हिन्दू फासीवादी भाजपा का मुकाबला करते हुए आम आदमी पार्टी को इसके अलावा कुछ नहीं सूझा कि हिन्दू मतदाताओं को लुभाने के लिए उससे प्रतियोगिता करे।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।