मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष अदालत में सुनवाई पूरी
संघ और भाजपाइयों का यह दुष्प्रचार भी है कि अतीत में सरकार ने (आजादी के बाद) हिंदू मंदिरों को नियंत्रित किया; कि सरकार ने मंदिरों को नियंत्रित करने के लिए बोर्ड या ट्रस्ट बनाए और उसकी कमाई को हड़प लिया। जबकि अन्य धर्मों विशेषकर मुसलमानों के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया। मुसलमानों को छूट दी गई। इसलिए अब हिंदू राष्ट्रवादी सरकार एक देश में दो कानून नहीं की तर्ज पर मुसलमानों को भी इस दायरे में लाकर समानता स्थापित कर रही है।
बहुत कम ईडी निदेशक रहे होंगे जो निरंतर चर्चा में बने रहते हैं। संजय मिश्रा ऐसों में सबसे ऊपर हैं। इनकी चर्चा भाजपा सरकार के इशारों पर नाचने वाले के तौर पर होती है। विपक्ष
उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने 27 जनवरी 2025 से समान नागरिक संहिता को लागू कर दिया है। इस संहिता को हिंदू फासीवादी सरकार अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है। संहिता
तुर्की में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन उस समय शुरू हुए जब 19 मार्च को तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्ताम्बुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी हुई।
पिछले कुछ वर्षों से देश में अलग-अलग लोगों की भावनाएं समय-समय पर आहत होती रहती हैं। यह भावनाएं हैं कि किसी विशेष मामलों में आहत होती है। शायद यह भावनाएं किसी खास मौके पर आ
पिछले दिनों भारत के हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज सवालों के घेरे में आ रहे हैं। ये सवाल अलग-अलग कोणों से उठ रहे हैं। इनमें भ्रष्टाचार से लेकर संवैधानिक दायित्वों त
यह कितना अजीब लगता है कि बाइस-तेइस साल से राजसी ठाठ-बाट के साथ रहने वाला आदमी हर मौके-बेमौके सारी दुनिया को बताता है कि उसका बचपन कितनी गरीबी में बीता। ऐसा लगता है मानो व
भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में धमकी भरे अंदाज में फरमाया ‘भारत कोई धर्मशाला नहीं है कोई जब चाहे यहां आकर रह जाए’ं अमित शाह को शायद पता हो न हो कि भारत के अमीर भ
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।