मजदूर आवाज

हरियाणा में वेतन वृद्धि और पूंजीपतियों की चीख-पुकार

/harayana-mein-salary-increase-and-capitalist-ki-cheekh-pukar

पिछले दिनों गुड़गांव के आई एम टी मानेसर में हरियाणा सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन वृद्धि को लागू करवाने के लिए मजदूरों हड़तालों का तांता लगा रहा। होंडा फैक्टरी से शुरू हुआ

दुनिया भर में उठी आवाज : ट्रम्प-नेतन्याहू खूनी हैं!

28 फरवरी को जैसे ही अमेरिकी साम्राज्यवादियों और उनके पिट्ठू इजरायल ने ईरान पर मनमाने तरीके से हमला बोला, वैसे ही दुनिया भर में इस अन्यायपूर्ण युद्ध के खिलाफ जनता के सड़कों

पी.एफ. की योजनायें मालिक के नाम

/p f-ki-yojanayein-malaik-ke-name

सरकार रोजगार को बढ़ावा देने के लिये तरह-तरह की योजनायें लाती रहती है। खासकर ऐसी योजनायें जिससे पूंजीपतियों को भी लाभ मिल सके। जैसे स्प्री स्कीम (SPREE SCHEME), प्रधानमंत्र

जापान के हड़तालों के बारे में गढ़े गये मिथक

/japan-ke-strike-ke-baare-mein-gadhe-gaye-mithak

पूरी दुनिया में जापान के मजदूरों के अत्यन्त परिश्रमी होने की बातें कही सुनी जाती है। भारत में तो इससे आगे यह भी कहानी सुनने को मिल जाती है कि जापान के मजदूर अपनी मांगें म

मेघालय : कोयला खदान में विस्फोट, 27 मजदूरों की मौत

/meghalay-coal-mines-mein-blast-27-workers-ki-death

मेघालय में 5 फरवरी को एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 27 मजदूरों की मौत हो गयी। अभी भी कई मजदूर 100 मीटर गहरे गड्डे में फंसे हैं। यह खदान पूर्वी जयंतिया हिल्स में थांगस

सरकार को झुकाने को अनवरत् संघर्ष जरूरी

/government-ko-jhukaane-ko-anavarat-struggle-jaruri

12 फरवरी की आम हड़ताल पिछले कुछ वर्षों की हड़तालों से कहीं अधिक सफल रही। स्कीम वर्कर्स, गिग मजदूरों-सरकारी कर्मियों के साथ कई जगह निजी क्षेत्र की यूनियनों ने भी हड़ताल की। द

आलेख

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।